सच्चे बंधन समझ ही नहीं पाते मनु की संतान शिवमय हो ही नहीं पाते। सच्चे बंधन समझ ही नहीं पाते मनु की संतान शिवमय हो ही नहीं पाते।
तेरे सम्मुख झुक न सकूं जो, इतना मुझमें दर्प नहीं है। तेरे सम्मुख झुक न सकूं जो, इतना मुझमें दर्प नहीं है।
पाया कौन तुम्हारा पार पाया कौन तुम्हारा पार
अपने प्राण तुम्हारे सुपुर्द कर बैठी ओ मेरे शिव, मैं सच में तुमसे प्यार कर बैठी अपने प्राण तुम्हारे सुपुर्द कर बैठी ओ मेरे शिव, मैं सच में तुमसे प्यार कर बैठ...
इस धरती पर सदियों से, अमर वही बन पाया है। इस धरती पर सदियों से, अमर वही बन पाया है।
नीले पड़ते जाते हैं इश्क़ में लाल रंग से। नीले पड़ते जाते हैं इश्क़ में लाल रंग से।